सूरत लिटरेचर फेस्टिवल 2026: महानगरों से परे राष्ट्रीय विचारों का मंच

सूरत (गुजरात) [भारत], जनवरी 5: भारत जब स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ रहा है, तब संस्कृति, शासन और राष्ट्रीय दिशा से जुड़े विमर्श अब भी कुछ गिने-चुने महानगरों तक सीमित हैं। ऐसे समय में सूरत लिटरेचर फेस्टिवल अपने चौथे संस्करण के साथ 9 से 11 जनवरी 2026 तक वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय में आयोजित होने जा रहा है, जिसका उद्देश्य भारत के बौद्धिक संवाद को महानगरों से बाहर विस्तार देना है।

सिर्फ एक साहित्यिक आयोजन न होकर विचार, नीति विमर्श और सांस्कृतिक चिंतन के मंच के रूप में विकसित हुआ सूरत लिटफेस्ट अपने आरंभ से लगातार व्यापक होता गया है। इसका तीसरा संस्करण (2025) भारत@2047 की व्यापक अवधारणा के तहत आयोजित किया गया था, जिसमें नीति निर्धारकों, विद्वानों, रक्षा विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और सांस्कृतिक हस्तियों ने भारत की दीर्घकालिक राष्ट्रीय यात्रा पर मंथन किया।

इन चर्चाओं में शासन, राष्ट्रीय सुरक्षा, शिक्षा, मीडिया, अर्थव्यवस्था और स्वदेशी ज्ञान परंपराओं जैसे विषय शामिल थे।

2025 के संस्करण में पूर्व इसरो अध्यक्ष डॉ. ए. एस. किरण कुमार, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, लेफ्टिनेंट जनरल एन. एस. आर. सुब्रमणि और अर्थशास्त्री डॉ. शमिका रवि जैसे वक्ता शामिल हुए। सशक्त सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने इन चर्चाओं को व्यापक जनभागीदारी प्रदान की।

विकसित भारत 2047 और नागरिक दृष्टि

हाल के वर्षों में सूरत लिटफेस्ट ने अपने विमर्श को विकसित भारत 2047 की संकल्पना से जोड़ा है। यह दृष्टिकोण भारत को स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक एक विकसित राष्ट्र बनाने पर केंद्रित है।

इसी संदर्भ में शिक्षा सुधार, रणनीतिक स्वायत्तता और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों पर चर्चाओं को राष्ट्रीय रोडमैप का हिस्सा माना गया है।

सभ्यतागत विमर्श

नीति और अर्थव्यवस्था के साथ-साथ यह आयोजन सभ्यतागत चेतना, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक स्मृति को आधुनिक सार्वजनिक विमर्श से जोड़ता है।

सूरत लिटरेचर फेस्टिवल 2026: महानगरों से परे राष्ट्रीय विचारों का मंच

2026 का त्रिदिवसीय कार्यक्रम

चौथे संस्करण का कार्यक्रम तीन विषयगत दिनों में विभाजित है।

पहला दिन:
उद्घाटन सत्र में स्वामी परमानंदजी, डॉ. भाग्येश झा, श्री किशोर माकवाना और श्री रत्नाकरजी शामिल होंगे। इसके बाद लोक और शास्त्रीय सांस्कृतिक संध्या होगी।

दूसरा दिन:
राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी युद्ध, मीडिया, धर्म और जेन ज़ेड तथा सिनेमा और भारत@2047 पर सत्र होंगे। इनमें मेजर जनरल शशि अस्थाना, वाइस एडमिरल शेखर सिन्हा, डॉ. बी. के. दास, डॉ. जी. के. गोस्वामी, दुश्यंत श्रीधर, विष्णु शंकर जैन, अभिनेता प्रतीक गांधी और फिल्म निर्देशक सुदीप्त सेन भाग लेंगे।

तीसरा दिन:
महिला शक्ति@2047, राजनीति@2047, RSS@100, शिक्षा और भारत@2047 तथा कम्युनिज़्म और भारत@2047 जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इनमें तहसीन पूनावाला, अजीत भारती, प्रदीप भंडारी, मेघना पंत, प्रो. एम. जगदीश कुमार, श्री रामलालजी और डॉ. दिलीप मंडल शामिल होंगे।

संस्कृति केंद्र में

10 जनवरी को अभिनेता प्रतीक गांधी द्वारा प्रस्तुत नाटक ‘हू चंद्रकांत बक्षी’ इस महोत्सव का प्रमुख आकर्षण होगा। इसके अतिरिक्त ‘Rhythms of India’ के अंतर्गत कथक, भरतनाट्यम, यक्षगान, कलारीपयट्टू और तमाशा जैसी कलाओं की प्रस्तुतियां होंगी।

विचारों के शहर के रूप में सूरत

एक ऐतिहासिक बंदरगाह से आधुनिक औद्योगिक नगर बने सूरत में यह आयोजन महानगर-केंद्रित बौद्धिक विमर्श को चुनौती देता है।

सूरत लिटरेचर फेस्टिवल 2026 का आयोजन 9 से 11 जनवरी तक वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय में होगा।
अधिक जानकारी के लिए देखें: www.srtlitfest.com

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