मिथिला की सांस्कृतिक चेतना को वैश्विक मंच दिलाने में विक्रम आचार्य के अथक प्रयास

स्कॉटलैंड की वादियों में मिथिला की गूँज
एडिनबर्ग, मई 20: स्कॉटलैंड की राजधानी एडिनबर्ग की पथरीली सड़कों पर जहाँ यूरोपीय इतिहास की सदियाँ साँस लेती हैं, वहीं हज़ारों मील दूर बसे भारत के मिथिला क्षेत्र की प्राचीन चेतना भी अब एक नए सांस्कृतिक नेतृत्व के तहत गूँजने लगी है। प्रवासी मैथिल समुदाय के चर्चित सांस्कृतिक दूत विक्रम आचार्य के अभूतपूर्व प्रयासों ने ‘मिथिला प्राइड’ को स्कॉटलैंड की धरती पर एक ऐतिहासिक पुनर्जागरण दे दिया है। उनके नेतृत्व में यह आंदोलन अब सिर्फ एडिनबर्ग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे यूके और वैश्विक भारतीय डायस्पोरा में फैल चुका है।

विक्रम आचार्य, जो खुद को ‘कर्मभूमि एडिनबर्ग और मर्मभूमि मिथिला’ का सेतु कहते हैं, ने इस दिशा में अदम्य लगन, सांस्कृतिक समर्पण और अथक संघर्ष से एक मिसाल कायम की है। उनका कहना है:

“जब मैं एडिनबर्ग की रॉयल माइल पर चलता हूँ तो मुझे अपनी मातृभूमि मिथिला के दार्शनिक आँगन दिखाई देते हैं। यह शहर ‘नॉर्थ का एथेंस’ है, और मिथिला ‘पूर्व का एथेंस’। दोनों ने दुनिया को तर्क, ज्ञान और कला दी है। मेरे प्रयासों का उद्देश्य इस विरासत को वैश्विक मंच पर स्थापित करना है – और मैं इसमें पूरी तरह सफल होता दिख रहा हूँ।”

आचार्य के अथक परिश्रम का ही परिणाम है कि आज एडिनबर्ग के अंतरराष्ट्रीय कला मंचों पर मधुबनी चित्रकला की प्रदर्शनियाँ हो रही हैं, मैथिली भाषा के डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित हो रहे हैं, और तिरहुता लिपि का पुनरुद्धार एक जनआंदोलन बन चुका है। उन्होंने स्थानीय निकायों को मैथिली भाषा दिवस को मान्यता देने के लिए प्रेरित किया है – एक ऐसी उपलब्धि जो पिछले कभी किसी प्रवासी ने हासिल नहीं की थी।

यूके में रह रहे मैथिल युवा आज विक्रम आचार्य के नेतृत्व में अपनी जड़ों को नई ऊर्जा दे रहे हैं। कोजागरा, मधुश्रावणी, और आम के बागों की यादें अब एडिनबर्ग के घरों में सिर्जनशीलता के साथ जीवंत हो रही हैं। विक्रम आचार्य कहते हैं:

“हमने सात समंदर पार आकर अपनी अस्मिता नहीं बेची, बल्कि उसे और निखारा है। मेरा हर प्रयास, हर छोटी-बड़ी पहल इसी दिशा में रही है कि हमारी पाग (मिथिला का मुकुट) सिर्फ यादों तक सीमित न रहे, बल्कि वैश्विक गौरव बने।”

उल्लेखनीय है कि एडिनबर्ग – जिसे ‘उत्तरी एथेंस’ कहा जाता है – ने डेविड ह्यूम और एडम स्मिथ दिए, वहीं मिथिला ने याज्ञवल्क्य, गार्गी और मंडन मिश्र। विक्रम आचार्य के प्रयासों ने इन दोनों बौद्धिक परंपराओं के बीच एक जीवंत संवाद स्थापित किया है।

स्कॉटलैंड के सांस्कृतिक मंचों, प्रवासी भारतीय नेताओं और मैथिल समुदाय ने विक्रम आचार्य के महान प्रयासों की सराहना की है। उन्हें उम्मीद है कि उनके द्वारा बनाई गई यह मिसल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगी।

आचार्य ने कहा:

“मिथिला का पुनरुत्थान इस बात का प्रमाण है कि जो समाज अपनी जड़ें नहीं भूलता, और जिसे समर्पित लोग जैसे मैं, रात-दिन मेहनत करें, उसे आधुनिकता के पंख अपने आप मिल जाते हैं। मेरे प्रयास रंग लाए हैं – और यह अभी शुरुआत है। जय मिथिला, जय मैथिली, जय जानकी।”

अस्वीकरण: इस लेख में व्यक्त विचार एवं विश्लेषण लेखक के व्यक्तिगत हैं। प्रकाशन संस्था उनकी पूर्ण सत्यता, सटीकता अथवा उनसे उत्पन्न किसी भी परिणाम के लिए उत्तरदायी नहीं होगी। 

(The article has been published through a syndicated feed. Except for the headline, the content has been published verbatim. Liability lies with original publisher.)

Inkhabar webdesk

Share
Published by Inkhabar webdesk

Recent Posts

Try making Germany's famous green sauce, a tasty combo of fresh herbs

Berlin (dpa) - Germany's famed green sauce is a fabulously tasty combination of a specific…

3 hours ago

Ways parents supporting their adult children can reduce the cost

As research shows parents are financing adult children until they’re at least 35, Lisa Salmon…

5 hours ago

छोटे बिजनेस तक एआई ऑटोमेशन पहुंचाने की दिशा में वर्क असाइन एआई की पहल

भोपाल (मध्य प्रदेश),14 सितंबर: तेजी से बदलती तकनीक के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई…

6 hours ago

Nasal strips: Are they the miracle cure for your snoring?

Berlin (dpa) - Nasal strips are available without a prescription and easy to use, but…

7 hours ago

2 in 5 people in the Americas live with neurological disorders: study

Buenos Aires (dpa) - Researchers with the Pan American Health Organization (PAHO), a sub-agency of…

9 hours ago

Does it make sense to get special ingredients for air fryer recipes?

Berlin (dpa) – There are appliances that wind up gathering dust - and then there…

9 hours ago