स्कूल की शिकायतें सिर्फ अनुशासनहीनता नहीं, बच्चे की कठिनाई का संकेत: डॉ विनी झारिया

डॉ. विनी झारिया एक आर.सी.आई.-पंजीकृत (RCI-registered) क्लिनिकल और बाल मनोवैज्ञानिक (Child Psychologist) हैं और अपने क्षेत्र में एक दशक से अधिक के अनुभव के साथ एक टेडएक्स (TEDx) वक्ता भी हैं। वह ऊर्जस्विनी चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर और स्पेशल स्कूल , इंदौर की संस्थापिका हैं। उनके कार्यों में मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन, आई.क्यू. और संज्ञानात्मक परीक्षण (cognitive testing), विकासात्मक एवं व्यावहारिक मूल्यांकन, सीखने में आने वाली कठिनाइयाँ (learning difficulties) और बहुविषयक बाल हस्तक्षेप (multidisciplinary child intervention) आदि शामिल हैं।

इंदौर (मध्य प्रदेश) [भारत], 23 सितंबर: स्कूल से बार-बार यह शिकायत मिलना कि बच्चा कक्षा में ध्यान नहीं देता, सीट से उठता रहता है, निर्देश नहीं मानता, काम पूरा नहीं करता, पढ़ाई से बचता है या जल्दी गुस्सा हो जाता है, हमेशा अनुशासन की समस्या नहीं होती । इसके पीछे ध्यान संबंधी कठिनाई, सीखने में परेशानी, चिंता, नींद की समस्या, भावनाओं को नियंत्रित करने में कठिनाई या अन्य विकासात्मक कारण हो सकते हैं ।

इंदौर की क्लिनिकल और बाल मनोवैज्ञानिक डॉ. विनी झारिया के अनुसार, “जो व्यवहार हमें बाहर से जिद, शरारत या लापरवाही जैसा दिखाई देता है, कई बार वह बच्चे की किसी ऐसी कठिनाई की अभिव्यक्ति होता है जिसे वह स्वयं समझ या बता नहीं पा रहा होता। इसलिए केवल यह पूछना कि बच्चा ऐसा क्यों कर रहा है, पर्याप्त नहीं है; हमें यह भी समझना चाहिए कि उसे कठिनाई कहां हो रही है।”

हर शिकायत का मतलब एडीएचडी नहीं होताकक्षा में ध्यान भटकना, सीट से बार-बार उठना, निर्देश भूलना और काम अधूरा छोड़ना एडीएचडी में दिखाई दे सकता है, लेकिन इन संकेतों में से किसी एक के आधार पर एडीएचडी का निदान नहीं किया जा सकता।

एक शोध के अनुसार एडीएचडी के लिए कोई एक परीक्षण नहीं है । नींद की समस्या, चिंता, अवसाद और कुछ प्रकार की सीखने की कठिनाइयां भी मिलते-जुलते लक्षण पैदा कर सकती हैं । बच्चे के व्यवहार को घर, स्कूल और दूसरी परिस्थितियों में समझना तथा माता-पिता और शिक्षकों, दोनों से जानकारी लेना मूल्यांकन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

डॉ विनी झारिया ने बताया की पढ़ाई में कठिनाई भी अक्सर व्यवहार की समस्या जैसी दिखाई देती है । उदाहरण के लिए, यदि बच्चा पढ़ने, लिखने, वर्तनी, गणित या लिखे हुए को समझने में लगातार संघर्ष कर रहा है, तो वह कठिन कार्य से बच सकता है, काम शुरू करने में देर कर सकता है, दूसरी चीजों में ध्यान लगा सकता है या जल्दी गुस्सा हो सकता है।

स्कूल की शिकायतें सिर्फ अनुशासनहीनता नहीं, बच्चे की कठिनाई का संकेत: डॉ विनी झारिया

ऐसे में माता-पिता और शिक्षक के लिए एक महत्वपूर्ण प्रश्न है: बच्चा काम नहीं करना चाहता, या वह यह काम कर नहीं पा रहा है?”

दोनों स्थितियां देखने में एक जैसी लग सकती हैं, लेकिन उनके कारण और सहायता के तरीके अलग होते हैं। बच्चों में चिंता भी हमेशा रोने या डरने के रूप में सामने नहीं आती। बार-बार पेट दर्द की शिकायत, स्कूल जाने से बचना, गलती करने का अत्यधिक डर, बार-बार आश्वासन मांगना, कठिन काम से बचना या चिड़चिड़ापन भी भावनात्मक परेशानी से जुड़े हो सकते हैं।

नींद को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। 35,936 स्कूली बच्चों पर किए गए 86 अध्ययनों के मेटा-विश्लेषण में कम नींद का संबंध कमजोर उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक कार्यप्रणाली, कम शैक्षणिक प्रदर्शन और अधिक व्यवहार संबंधी समस्याओं से पाया गया।

इसी प्रकार हर समस्या के लिए मोबाइल को जिम्मेदार ठहराना भी उचित नहीं है। 87 अध्ययनों और 1,59,425 बच्चों पर हुए एक मेटा-विश्लेषण में अधिक स्क्रीन समय और व्यवहारिक तथा भावनात्मक समस्याओं के बीच छोटा लेकिन महत्वपूर्ण संबंध पाया गया, लेकिन शोध में यह कारण-परिणाम का सीधा प्रमाण नहीं था।

डॉ. झारिया के अनुसार, “स्क्रीन समय को अकेले देखने के बजाय यह देखना अधिक उपयोगी है कि उससे बच्चे की नींद, पढ़ाई, शारीरिक गतिविधि, परिवार के साथ समय और दिनचर्या कितनी प्रभावित हो रही है।”

कब विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए? हर छोटी स्कूल शिकायत के लिए मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन जरूरी नहीं है। लेकिन यदि एक जैसी शिकायतें कई सप्ताह या महीनों से लगातार आ रही हों, समस्या घर पर भी दिखाई देती हो, पढ़ाई अपेक्षित स्तर से पीछे होती जा रही हो, बच्चा बार-बार कार्य से बचता हो, अत्यधिक चिंतित हो, स्कूल जाने से मना करे या उसके व्यवहार से पढ़ाई और मित्रता प्रभावित होने लगे, तो विशेषज्ञ से परामर्श लेना उपयोगी हो सकता है।

मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन का उद्देश्य बच्चे को कोई “लेबल” देना नहीं, बल्कि उसकी ताकत, कठिनाइयों और उनके कारणों को समझना है। आवश्यकता के अनुसार विकासात्मक इतिहास, स्कूल से मिली जानकारी, ध्यान, संज्ञानात्मक क्षमताएं, शैक्षणिक कौशल, व्यवहार और भावनात्मक स्थिति का मूल्यांकन किया जा सकता है।

माता-पिता अभी क्या कर सकते हैं?स्कूल से शिकायत मिलते ही बच्चे को डांटने से पहले शिक्षक से ठोस उदाहरण पूछें—किस समय समस्या अधिक होती है? किस विषय में? बच्चा निर्देश समझता है लेकिन पूरा नहीं कर पाता, या निर्देश ही समझ नहीं पाता? पढ़ने-लिखने में भी कठिनाई है? समस्या रोज होती है या कुछ खास परिस्थितियों में?

ऐसी जानकारी अक्सर समस्या की दिशा समझने में “ध्यान नहीं देता” जैसे सामान्य वाक्य से कहीं अधिक उपयोगी होती है।

डॉ. विनी झारिया कहती हैं, “स्कूल की शिकायत अपने आप में कोई निदान नहीं है, लेकिन बार-बार आने वाली शिकायत एक संकेत जरूर है। केवल व्यवहार को रोकने की कोशिश करने से पहले यह समझना जरूरी है कि उस व्यवहार के पीछे बच्चे को कौन-सी कठिनाई हो रही है।”

सही कारण समझने के बाद ही तय किया जा सकता है कि बच्चे को कक्षा में बदलाव, उपचारात्मक शिक्षा, परामर्श, व्यवहार संबंधी सहायता या विस्तृत मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन में से किसकी आवश्यकता है।

(The article has been published through a syndicated feed. Except for the headline, the content has been published verbatim. Liability lies with original publisher.)

Inkhabar webdesk

Share
Published by Inkhabar webdesk

Recent Posts

AI in the kitchen: Research shows many people remain sceptical

Frankfurt (dpa) - Artificial intelligence is making increasing inroads into the world of food and…

8 hours ago

नमो संवेदना दिवस: SVNM ट्रस्ट का २०० निःशुल्क नेत्र सर्जरी का संकल्प

सुपा, नवसारी  [भारत],19 सितंबर: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस के पावन अवसर पर…

9 hours ago

Probes of fossilized vomit reveal giant, extinct marine reptiles

Ancient sea monsters’ vomit has been found buried under the seabed, and scientists say it…

10 hours ago

'Brothers' on Apple TV: McConaughey and Harrelson play with a rumour

Woody Harrelson and Matthew McConaughey are back as a duo, but this time they’re playing…

10 hours ago

फूड इंडस्ट्री में डेटा आधारित लागत प्रबंधन की दिशा में Focus Prism की पहल

कोयंबटूर [भारत], 21 मई: खाद्य और हॉस्पिटैलिटी उद्योग में बढ़ती लागत, कच्चे माल की कीमतों…

11 hours ago