नोएडा (उत्तर प्रदेश) [भारत], 19 जनवरी: भारत को विश्व का एक प्रमुख कपड़ा बाजार माना जाता। लेकिन कपड़ों की देखभाल की भारत में अभी तक बहुत ही कम चर्चा थी। पसंदिदा कपडे ख़रीदना सबको भाता है, लेकिन जब उनके रख रखाव की बात आती है, हम एक कारगर उपाय की तलाश में रहते हैं। इंडिया फैब्रिक-केयर इंडेक्स (कपड़ा देखभाल सूचकांक) 2026, जो देश में 60 से ज्यादा शहरों से एकत्रित डेटा पर आधारित है, की रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में कपड़ों के जल्दी खराब होने का मुख्य कारण उन्हें घिसना नहीं बल्कि गलत तरीके से धोना है। रिपोर्ट के अनुसार, बार-बार धोना, गलत डिटर्जेंट का इस्तेमाल और ठीक से न सुखाना, ये सभी मिलकर भारतीय घरों के कपड़ों को जल्दी खराब कर रहे हैं। यह आदत शहरों और कस्बों, दोनों जगह आम होती जा रही है।
1. भारत में कपड़े कितनी बार धोए जाते हैं?
| कपड़ों का प्रकार | महीने में औसतन धुलाई |
| टी-शर्ट, शर्ट | 10–14 बार |
| जींस और पैंट | 6–8 बार |
| ऑफिस वियर | 8–10 बार |
| साड़ी, कुर्ता | 1–3 बार |
| सर्दियों के कपड़े | 2–4 बार |
| जिम और एक्टिववियर | 12–16 बार |
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय विश्व औसत से 30-40% अधिक कपड़े धोते हैं। इसका कारण है – गर्म मौसम, पसीना और प्रदूषण। हालांकि, अधिक धोने का मतलब यह नहीं है कि कपड़े साफ हो जाते हैं। बल्कि इसके विपरीत होता है:
यही कारण है कि शहरी परिवार अपनी वास्तविक आवश्यकता से लगभग 40% पहले ही कपड़े बदल देते हैं।
2. कपड़ों के जल्दी खराब होने की सच्चाई
कपड़ा देखभाल सूचकांक कहता है कि:
सूती, डेनिम, रेशम और सिंथेटिक – सभी को धोते समय एक जैसा ही व्यवहार मिलता है, हालांकि हर कपड़े की जरूरत अलग-अलग होती है।
हर चीज को एक समान धोने की यह आदत हर घर को सालाना 8,000 से 12,000 रुपये का नुकसान पहुंचा रही है।

3. देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग आदतें हैं
उत्तर भारत:
यहाँ सर्दियों के भारी कपड़े अधिक होते हैं और उन्हें बार-बार धोना पड़ता है। इसलिए लोग सॉफ़्नर और कंडीशनर का अधिक उपयोग करते हैं।
पश्चिम और दक्षिण भारत:
दक्षिण में नमी अधिक होती है, इसलिए कपड़ों को जल्दी धोना पड़ता है। पश्चिम में, कपड़ों को सफेद करने के लिए तेज़ डिटर्जेंट का चलन है।
अब 2026 में, लोग धीरे-धीरे लिक्विड और मशीन-फ्रेंडली डिटर्जेंट की ओर बढ़ रहे हैं जो कपड़ों पर हल्के होते हैं और पाउडर नहीं छोड़ते।
टियर-2 और टियर-3 शहर:
यहाँ हाथ से कपड़े धोना अभी भी आम है, लेकिन आय में वृद्धि और समय की कमी के कारण, लोग पेशेवर लॉन्ड्री सेवाओं की ओर रुख कर रहे हैं। लोग अब सस्ते विकल्पों के बजाय बेहतर सेवा को प्राथमिकता देते हैं।
4. साड़ी से स्नीकर्स की ओर बदलती सोच
रिपोर्ट में कहा गया है कि अब कपड़ों को सिर्फ पहनने का साधन और निवेश माना जाता है।
सोच अब “सिर्फ धोना” से बदलकर “ठीक से संभालना” हो गई है। यही कारण है कि वॉशमार्ट जैसे आधुनिक लॉन्ड्री ब्रांड लोगों को अपने कपड़ों की देखभाल के बेहतर तरीके सिखा रहे हैं। Washmart के आज 300+ से अधिकदुकान 122 से शहरों में मौजूद है – यह तथ्य इतने कम समय में बाजार में इसकी बढ़ती लोकप्रियता को प्रमाणित करता है। असंगठित लॉन्ड्री और ड्राई-क्लीनिंग क्षेत्र को संगठित करने और विविध ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए वाशमार्ट की लॉन्ड्री और ड्राई क्लीनिंग सर्विस में दृढ़ प्रतिबद्धता ही देश भर में इसके व्यापक विस्तार का मुख्य कारण रही है।
5. पेशेवर कपड़े की देखभाल की बढ़ती आवश्यकता
पहले, कपड़े धोना सिर्फ एक घरेलू काम था। अब यह एक ऐसी सेवा में बदल रहा है जो पूरे वॉर्डरोब की सुरक्षा करती है।
लोग पेशेवर लॉन्ड्री क्यों चुन रहे हैं?
यही कारण है कि Washmart जैसे भरोसेमंद ब्रांड आज न केवल कपड़ों की सफाई करते हैं बल्कि उन्हें लंबे समय तक नया बनाए रखने में भी मदद करते हैं। वॉशमार्ट लॉन्ड्री फ्रैंचाइज़ी ने पांच साल के भीतर ही 26 राज्यों और विभिन्न शहरों में अपनी पहुंच बना ली है। यह तीव्र विस्तार ब्रांड के केवल टियर 1 शहरों पर ही नहीं, बल्कि आर्थिक विकास वाले टियर 2 और टियर 3 शहरों पर भी ध्यान केंद्रित करने, धुलाई और इस्त्री सेवा को आउटसोर्स करने की बढ़ती मांग और तेजी से हो रहे शहरीकरण के कारण संभव हुआ है। अगर आप भी लॉन्ड्री और ड्राई क्लीनिंग सर्विस पास में ढूंढ रहे हैं तो संभावना है कि एक Washmart स्टोर आपके शहर में भी सुविधा दे रहा होगा।
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